प्रमुख गतविधियाँ
   

क्रीडा क्षेत्र में "आदर्श क्रीडा संस्कृती, शुद्ध चरित्र और देश भक्ती" की और ध्यान बढाने के लिए विविध उपक्रम किये। सभी जगह पंचसूत्री के आधारपर कार्यक्रम होते हे।

 1. सूर्यनमस्कार एवं विश्व योग दिवस : २१ जून को सारे विश्व में योग दिवस मनाया जाए इसलिए वर्षभर संपर्क करते है| देशमे वर्षारुतु के कारण अधिकतम हिस्सेमे लेटकर या बैठकर योगासन करनेमे सार्वजनीक जगहोंपर रूकावटे आती है| इसलिए क्रीड़ा भारती प्रतिवर्ष खड़े रहकर सहज्तासे किये जानेवाले आसनोंकी मालिका प्रसिद्ध करती हैं| ग्राम, बस्ती तक विश्व योग दिवस कार्यक्रम करने का लक्ष्य रखा हैं|

2. श्री हनुमान जयन्तीः हनुमान जयन्ती चैत्र पूर्णिमा को क्रीड़ा भारती का कार्य आरम्भ हुआ। अतः शक्ति, बुद्धि और युक्ति के प्रतिमान श्री हनुमान जी के जन्म दिवस पर विविध कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इस दिवस को क्रीड़ा भारती स्थापना दिवस के रुप में मनाया जाता है।

3. राष्ट्रीय खेल दिवस एवं युवा चेतना दौड़:  स्वामी विवेकानंद ने ११ सितम्बर को शिकागोमे दिए भाषणसे भारतीय संस्कृती का परिचय पुरे विश्वको हुआ था| इसिके स्मृतिमे युवा चेतना दौड़ का आयोजन देश के विभिन्न क्षेत्रोमे होता है|

4. क्रीडाज्ञान परीक्षाः छात्रों तथा अभिभावकों में खेलों के प्रति रुचि बढाने के लिए क्रीडाज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जाता है। प्रश् पत्रिका बालकों को घर से हल करने के लिए दी जाती है। सभी परिवार जन मिल कर प्रश्नों का उत्तर खोजते है। इससे सभी में खेलों के प्रति रूचि बढती है, खेलों के प्रति ज्ञान बढता है और क्रीडा भारती की जानकारी भी घर-घर तक पहुँचती है।

5. वीरमाता जिजाऊ पुरस्कारः विपरीत परिस्थितिओं में भी साथीयों को साथ लेकर राष्ट्रनिर्माण का आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज ने प्रस्तुत किया। परन्तु छत्रपति शिवाजी में वीरता, धीरता और संकल्पशक्ति को भरने का कार्य किया था माता जीजाबाई ने। माता जीजाबाई के योग्य लालन-पालन के कारण ही छत्रपति में राष्ट्रनिर्माण के लिए योग्य गुणों का निर्माण हो सका था। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विजेता खिलाडियों को तो पुरस्कार मिलते है। किन्तु उनके पालकों को कोई नही जान पाता।

इस लिए ऐसे खिलाडियों की माताओं का सम्मान करने के लिए क्रीडा भारतीवीरमाता जीजाऊ पुरस्कारप्रदान करती है। यह कार्यक्रम प्रत्येक प्रान्त और जिला स्तर पर आयोजित किया जाता है।

- अब तक सम्पन्न प्रमुख गतिविधियाँ 

रिले अल्ट्रा मैराथनः भारतीय स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 1997 में पुणे-शनिवार वाडा से मुम्बई गेट वे ऑफ इण्डिया तक 475 कि मी की दौड का आयोजन किया गया। 10 धावकों का एक संघ इस प्रकार के कुल 300 धावकों ने इस दौड में सहभागिता की। 4 दिनों में दौड पूरी हुई। एक दिन में 137 कि मी की दूरी पूरी करने का इतिहास इसी दौड में रचा गया। इस उपक्रम ने क्रीड़ा भारती की पहचान क्रीड़ा जगत में करा दी।

साईकिल भ्रमण यात्राः व्यक्तिगत साहस तथा प्रदुषण रहित साधन का उपयोग बढे इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर दिसम्बर 2011 में दिल्ली, उज्जैन एवं बैंगलोर से एक ही समय में चारों दिशाओं में यात्रा प्रारम्भ हुई। सभी ने मिलकर 2500 कि मी दूरी पूरी की।

सेमीनार-संगोष्ठीका आयोजनः Not only Physical Training but Sports should made compulsory as core subject in schools इस विषय पर डोम्बिवली (मुम्बई) में सेमिनार का आयोजन किया था। चेन्नई, चंदीगढ, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा सहित अनेक प्रान्तों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सेमीनार में पारित प्रस्ताव केन्द्र सरकार के खेल विभाग को प्रस्तुत किये, जिसमें से अधिकांश प्रस्ताव स्वीकृत किये गये।

अखिल भारतीय क्रीडा साहित्य सम्मेलनः खेल विषयों पर प्रकाशित अनेक किताबों, खेल और व्यायाम के साधनों का परिचय समाज को कराने के लिए क्रीडा साहित्य सम्मेलन महाराष्ट्र के कोल्हापूर में हुआ था। देश के सभी क्षेत्रों ने इसमें सहभागिता की। अप्रैल 2016 में ऐसा ही साहित्य सम्मेलन पुणे में होने वाला है।

सक्षम महिला निर्भय महिला अभियानः बहिनों पर बढतें अत्याचारों को रोकने के लिए क्रीडा भारती नेसक्षम महिला-निर्भय महिला अभियानचलाया है। सभी प्रान्तो में सफल प्रयोग के बाद .भा. प्रशिक्षण वर्ग अप्रैल 2015 में दिल्ली में हुआ। 12 प्रान्तो की 87 बहिनों इसमे भाग लिया।

इस प्रशिक्षण वर्ग में आत्मरक्षा के गुण सिखाये गये। अपने-अपने प्रान्तों में क्रीडा केन्द्रों के द्वारा इस अभियान का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प लिया गया।

पर्वतारोहणः साहसी खेलों का प्रचार-प्रसार करने के लिए और छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक किलों पर जाकर समझने के लिए नवम्बर 2015 में पर्वतारोहण अभियान का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के .पू. सरसंघ चालक मा. डॉ. मोहन जी भागवत ने अपने कर कमलों से झण्डी दिखाकर इस अभियान का शुभारम्भ किया। इस अभियान में शिवनेरी, सिंहगढ, राजगढ, प्रतापगढ एवं पुरन्दर किलों पर चढकर कायकर्ताओं ने उत्साह प्राप्त किया। इस अभियान का समापन शिवाजी महाराज के चरित्र लेखक एवं शिवकथाकार श्रीमान् बाबासाहेब पुरंदरेजी की उपस्थिति में हुआ।